सोवियत संघ का विघटन (DISINTEGRATION OF THE SOVIET UNION)

सोवियत संघ का विघटन 

-(DISINTEGRATION OF THE SOVIET UNION)-



कौन हैं मिखाइल गोर्बाचोव जिनकी नीतियों से सोवियत संघ का विघटन हुआ?

मिखाइल गोर्बाचोव सोवियत संघ (USSR) के अंतिम नेता थे। उन्होंने 1985 से 1991 तक सोवियत संघ की सत्ता संभाली। वे इतिहास में इसलिए प्रसिद्ध हैं क्योंकि उन्होंने सोवियत संघ में राजनीतिक और आर्थिक सुधारों की शुरुआत की, जिनके परिणामस्वरूप अंततः सोवियत संघ का विघटन हुआ।

इस अवधि में (1985-1991)वे कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव भी रहे।

उनके द्वारा दो मुख्य सुधार किए गए जो निम्नलिखित हैं:

1. ग्लासनोस्त (Glasnost) – इसका अर्थ है “खुलापन”। इस नीति के तहत गोर्बाचोव ने जनता को अभिव्यक्ति की अधिक स्वतंत्रता दी और सरकार के कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाई।

2. पेरेस्त्रोइका (Perestroika) – इसका अर्थ है “पुनर्गठन”। यह नीति आर्थिक सुधारों से संबंधित थी, जिसमें बाजार आधारित अर्थव्यवस्था के कुछ तत्व शामिल किए गए।

उन्होंने अमेरिका के साथ हथियार नियंत्रण समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।

उन्होंने शीत युद्ध (Cold War) को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनके सुधारों से सोवियत संघ में लोकतंत्रीकरण बढ़ा, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता भी आई।फलस्वरूप 1991 में सोवियत संघ बिखर गया और 15 स्वतंत्र देशों का गठन हुआ।
उन्हें 1990 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला।

सोवियत संघ की समाप्ति : 



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25 दिसंबर 1991 को सोवियत संघ के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोव ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए सोवियत संघ की समाप्ति की घोषणा की। इसके साथ ही सोवियत ध्वज को क्रेमलिन भवन से उतार दिया गया और रूस का राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। 26 दिसंबर 1991 को सोवियत संसद ने संघ को औपचारिक रूप से भंग कर दिया। इस प्रकार सोवियत संघ का अंत हुआ और उसके स्थान पर 15 स्वतंत्र राष्ट्र अस्तित्व में आए।

 CIS का उदय(commonwealth Of Independent States) :

इन 15 स्वतंत्र राष्ट्र ने आपसी सहयोग बनाए रखने के लिए एक नए संगठन CIS का निर्माण किया जिसे "स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रमंडल" भी कहते हैं। इस संगठन का उद्देश्य हैं :

1. सदस्य देशों में सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना 
2. आपसी विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाना 
3. वस्तुओं ,सेवाओं, श्रम तथा व्यापार की आवाजाही सुनिश्चित करना आदि ।

CIS का  मुख्यालय- मिंस्क(Minsk) ,बेलारूस में है।


सोवियत संघ के विघटन के कारण :

1. कम्युनिस्ट पार्टी जिसका सोवियत संघ में शासन था, का जनता के प्रति जवाबदेह न होना। 

2. सोवियत प्रणाली में सत्तावादी विशेषताओं का आ जाना ।उदाहरण- नौकरशाही का शिकंजा बढ़ना।

3. सोवियत संघ के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रवादी भावनाओं और संप्रभुता की इच्छा का उभार होने लगा।

4. देश के संसाधनों का उपयोग हथियार निर्माण व रक्षा क्षेत्र में अधिक होने लगा।

5. सोवियत संघ आर्थिक, प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे के मामले में पश्चिमी देशों से पिछड़ने लगा।

6. यहां की अर्थव्यवस्था पिछड़ने लगी तथा उपभोक्ता वस्तुओं की कमी होने लगी।

7. गोरबाच्योव द्वारा किए गए सुधारों का विरोध होना।

 सोवियत संघ के विघटन के परिणाम :

1. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से चला आ रहा शीत युद्ध का संघर्ष अब समाप्त हो गया।

2. अब विश्व में केवल एक ही महाशक्ति बची- अमेरिका। यहीं से एक ध्रुवीय विश्व की शुरुआत हुई।

3. हथियारों की होड़ समाप्त हुई। 

4. सोवियत संघ का विघटन हो गया और 15 नए स्वतंत्र देशों का उदय हुआ।

5. रूस सोवियत संघ का उत्तराधिकारी बना। 

6. समाजवादी विचारधारा पर प्रश्नचिन्ह लग गया और पूंजीवादी उदारवादी विचारधारा का वर्चस्व हो गया।

7. पूर्वी यूरोप के कई देशों ने साम्यवादी व्यवस्था को छोड़कर उदारवादी पूंजीवादी व्यवस्था को अपनाया।

8. वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव होने लगे व नई शक्ति संरचनाओं उभरने लगी जैसे -यूरोपीय संघ (European union), नाटो(NATO) का विस्तार आदि।

9. अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे UNO, IMF, WORLD BANK आदि का प्रभाव बढ़ने लगा।

 उपर्युक्त बिंदुओं के विश्लेषण से आप समझ गए होंगे कि सोवियत संघ का विघटन (1991) विश्व इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है जिसका आने वाले वर्षों पर काफी व्यापक प्रभाव पड़ा।

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