सत्ता के वैकल्पिक केंद्र -II

-आसियान -

-ASEAN -

सत्ता के दूसरे वैकल्पिक केंद्र के रूप में हम आसियान (ASEAN) को समझेंगे। दूसरे विश्व युद्ध से पहले और उसके दौरान दक्षिण पूर्वी एशिया (south east asia) का यह हिस्सा यूरोपीय और जापानी साम्राज्यवाद का शिकार रहा जिससे इस क्षेत्र को काफी आर्थिक और राजनीतिक हानियों का सामना करना पड़ा| इससे  ये देश आर्थिक पिछड़ेपन ,गरीबी जैसी समस्याओं का शिकार हो गए|  शीत युद्ध के दौरान इन देशों को महाशक्तियों के दबावों का भी सामना करना पड़ा क्योंकि अमेरिका तथा सोवियत संघ दोनों  इस क्षेत्र को अपने पक्ष में शामिल करना चाहते थे|  आप जानते हैं कि  बांडुंग सम्मेलन (1955) तथा गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) आदि के माध्यम से एशिया और तीसरी दुनिया के देशों में सहयोग बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे थे किंतु ये प्रयास इतने कारगर सिद्ध नहीं हो रहे थे|  इसलिए इन देशों ने अपने स्तर पर ही पहल करके आसियान संगठन (ASEAN) का निर्माण किया और विकास की एक नयी राह चुनी | 

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                                         आसियान के इस प्रतीक में धान की 10 बालियाँ हैं जो आपसी एकता को दर्शाती हैं  


 दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (आसियान):

ASSOCIATION FOR SOUTH EAST ASIAN NATIONS (ASEAN) :

1967 में बैंकॉक घोषणा पर हस्ताक्षर करके पांच देशों ने आसियान की स्थापना की पहल की ।ये पांच देश थे- मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर और फिलीपींस|  बाद के वर्षों में अन्य पांच देश भी इसमें शामिल हो गए और अब इस प्रकार इसके सदस्यों की संख्या 10 हो गई है ।

आसियान का उद्देश्य (OBJECTIVES):

1. इस क्षेत्र में आर्थिक विकास में तेजी लाना |

2. क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना |

3. शांति और सुरक्षा को आपसी सहयोग से स्थापित करना | 

4. सामाजिक व सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देना | 

 5. इस क्षेत्र में साझा बाजार स्थापित करना | 

 6. सदस्य देशों में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देना| 

 7. संयुक्त राष्ट्र संघ के दायरे में रहकर कानून के शासन को बढ़ावा देना | 

अर्थात राजनीतिक ,सामाजिक, आर्थिक, व्यापारिक, तकनीकी ,प्रशासनिक आदि सभी क्षेत्रों में सहायता व सहयोग को स्थापित करना | 

आसियान की संरचना (STRUCTURE):

शिखर सम्मलेन : यह आसियान की सर्वोच्च संस्था है जिसमें सदस्य देशों के शासन अध्यक्ष / राष्ट्राध्यक्ष भाग लेते हैं | 

मंत्री सम्मलेन : दूसरे स्तर पर मंत्री सम्मेलन है जिसमें सदस्य देशों के विदेश मंत्री भाग लेते हैं | इसकी वर्ष में एक बैठक होना अनिवार्य है | 

स्थाई सचिवालयजकार्ता ,इंडोनेशिया में है | इसके प्रमुख महासचिव होते हैं जो प्रशासनिक कार्यों का संचालन करते हैं | 

क्या है आशियान शैली (ASEAN WAY):

आसियान शैली इस संगठन की एक विशेष कार्य पद्धति है जिसमें विचार विमर्श करते हुए सर्वसम्मति से निर्णय लिए जाते हैं और प्रत्येक देश को समान महत्व दिया जाता है|  इसमें ये सभी देश सहयोग और मेल मिलाप की  पद्धति को अपनाते हुए एक दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करते हैं|  इन देशों ने ना तो कभी इस संगठन को राजनीतिक रूप देने की कोशिश की है ना ही इन्होंने अपने आप को किसी महाशक्ति से जोड़ने करने का प्रयास किया है|  

 

क्या है आसियान स्तंभ (ASEAN PILLARS ) : 

जिस प्रकार किसी घर स्तम्भ  स्तम्भ उसे मजबूती प्रदान करते हैं उसी प्रकार आसियान के स्तम्भ इसे मजबूती देने के लिए बनाये गए हैं | 

2003 में आसियान ने अपने तीन प्रमुख स्तंभों की स्थापना की | ये  हैं :  

आशियान सुरक्षा समुदाय :  इसका उद्देश्य आपसी विवादों को सहमति से सुलझाना है ताकि कोई भी विवाद सैनिक टकराव की स्थिति तक ना पहुंच पाए | इसलिए हर देश ने शांति सहयोग वह एक दूसरे के मामलों में हस्तक्षेप न करने का वचन दिया | 

आसियान आर्थिक समुदाय :  इसका उद्देश्य इस क्षेत्र के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक विवादों को निपटाना ,साझा बाजार तैयार करना तथा एक दूसरे देश को मजबूत आर्थिक सहयोग प्रदान करना है | साथ ही इस क्षेत्र को मुक्त व्यापार क्षेत्र (free trade area ) बनाना ताकि निवेश, श्रम ,वस्तुओं और सेवाओं की गतिशीलता बढ़ सके| 

आसियान सामाजिक सांस्कृतिक समुदाय :  इसका उद्देश्य बातचीत और सामाजिक सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा देना है ताकि एक साझी संस्कृतिक विरासत का निर्माण किया जा सके| 

भारत और आसियान सम्बन्ध :

(INDIA ASEAN RELATIONS):

शुरुआती वर्षों में भारतीय विदेश नीति में आसियान पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था किंतु पिछले कुछ वर्षों से भारत ने इस क्षेत्र पर फोकस किया है | 

1. आसियान के दो देशों सिंगापुर व थाईलैंड के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता ( free trade agreement ) है | साथ ही अन्य देशों के साथ भी भारत इस तरह के समझौते करने का प्रयास कर रहा है | 

2. 1991 की पूर्व की ओर देखो नीति (ACT EAST POLICY ) के तहत भारत आसियान पर और अधिक फोकस कर रहा है | 

3. आसियान के देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं | 

4. 1992 में भारत में आसियान के साथ SECTORAL DIALOGUE PARTNER  के रूप में संबंध शुरू किए | 

 5. 2012 से भारत और आसियान के संबंध रणनीतिक साझेदारी (STRATEGIC PARTNERSHIP) के स्तर पर हैं | 

6. भारत और आसियान आतंकवाद ,साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करते हैं | 

7. भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों के विकास के लिए आसियान देशों का सहयोग बहुत आवश्यक है | 

8. भारत -म्यांमार- थाईलैंड त्रिपक्षी राजमार्ग (IMT HIGHWAY ) जैसी परियोजनाएं क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने में बहुत महत्वपूर्ण है| 

आसियान विजन 2020 (ASEAN VISION 2020):

 यह आसियान समुदाय का एक दस्तावेज (DOCUMENT) है जिसमें यह बताया गया है कि आसियान समुदाय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किस प्रकार प्रभावी भूमिका निभा सकता है | 

आसियान की उपलब्धियां (ACHIEVEMENTS) :

1. आर्थिक तरक्की के मामले में आसियान देशों ने दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से गति करने वाले समूह के रूप में नाम कमाया है।

2. आसियान समुदाय ने सुरक्षा और विदेश नीति मामलों में सहयोग बढ़ाने के लिए 1994 में आसियान क्षेत्रीय मंच (ASEAN REGIONAL FORUM ) की स्थापना की है | 

3. यह एशिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्रीय संगठन है जो एशियाई देशों को राजनीतिक और सुरक्षा मामलों पर चर्चा के लिए राजनीतिक मंच उपलब्ध कराता है| 

4. शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान–प्रदान के माध्यम से लोगों के बीच आपसी संबंध को बढ़ाया है | 

5 . इस संगठन ने अमेरिका–चीन जैसी बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन बनाकर कूटनीतिक स्थिरता कायम रखी है।

6 . आसियान चार्टर, ध्वज, गीत और प्रतीकों के माध्यम से क्षेत्रीय पहचान को सुदृढ़ किया गया है।

7 . संगठन ने कंबोडिया में टकराव को समाप्त किया व पूर्वी तिमोर के संकट का निपटान किया | 

8 . 1999 से इस संगठन की नियमित बैठकें हो रही हैं| 

9 . भारत और चीन इस संगठन के प्रमुख सहयोगी सदस्य के रूप में सामने आए हैं | साथ ही जापान दक्षिण कोरिया अमेरिका आदि देशों से भी इस संगठन के महत्वपूर्ण आर्थिक संबंध है| 

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